माँ हर वक़्त मेरे पास है

Tuesday, 15 May 2012 18:30 administrator
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Sandhya Sharma pays tribute to all mothers of the world.

 

 

जब कभी भी मैं  उदास होता  तो माँ की पलकें  नम हो  जाती
कोई मुझसे  भला-बुरा  कहता तो माँ बड़ी परेशान होती
मुझे याद है वो  दिन जब बाबा ने मुझे बहुत डांटा था
और मैं बगैर  खाना खाए ही  सो गया ,
उस रात माँ ने भी खाना नहीं खाया था,
रात को माँ सिरहाने बैठ कर मेरे सर  पे हाथ घुमाती रही और रोती रही ,
बहुत रोई थी उस रात  वो
मैं नींद में था ,फिर भी उस दर्द के स्पर्श को महसूस कर सकता था ,
रिश्ता ही कुछ ऐसा था उससे ....
जब   कुछ गलत काम करता तो गुस्सा भी बहुत करती ,डांटती भी थी ,
कभी कभी तो थप्पड़ भी धर देती थी
मैं सोचता ,सब की माँ कितनी अच्छी होती है ,उन्हें डांटती तक  नहीं
और एक मेरी माँ है ......!
कभी खेलते हुए अगर   मैं बच्चों से लड़कर आता
तो उनसे मुझे बचाती भी , मगर  उनके जाने पर गुस्सा बहुत करती
बड़ी अजीब  थी मेरी माँ ...
शायद सबकी माँ ऐसी ही होती है
उसके होने से महफूज़ होने का एहसास होता है ,
उसके होने से ख़ुदा के होने का एहसास होता है

एक दिन जब कॉलेज  से लौटा तो देखा
सफ़ेद चादर में लिपटी माँ निढाल सी सोई थी
उस गर्मी के मौसम में भी उसका बदन ठंडा हो रखा  था
आज तक इतना दर्द कभी महसूस नहीं किया था मैंने
बहुत फूट -फूट कर रोया था मैं ,
आंसू थे जो थमते ही न थे  ,
पर मेरे सिरहाने बैठकर, मेरे बालों में  हाथ घुमाकर
मुझे दिलासा देने  वाला कोई नहीं था आज 
बहुत अकेला था मैं आज ,
एक जैसे माँ के चेहरे को देख रहा था
वो गुस्से में लाल चेहरा , वो न चाहते हुए भी डांटता हुआ चेहरा ,
हमारी खुशियों में खुश होकर  हँसता हुआ चेहरा,
हमारी परेशानियों में सबसे ज्यादा परेशान होता वो  चेहरा
सारे चेहरे एक के बाद एक किसी फिल्म की तरह
मेरी आँखों के सामने से गुज़र रहें थे 
बहुत रोया मैं उससे लिपटकर ,
माँ के उस बर्फ से चेहरे के बंद आँखों की किनारी से
जाने आंसू क्यूँ गिरे ,छूकर देखा तो गर्म थे
शायद इस वक़्त भी मेरे दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पाई थी वो
रिश्ता ही कुछ ऐसा था उससे  .....

उस चाँद को देखकर, माँ की चंदा मामा वाली लोरी आज भी याद करता हूँ
जाने कितने दर्द के तूफां और खुशियों की लहरें रूबरू हुई जिंदगी से
और मैंने भी बड़ा डटकर मुकाबला किया सबका
क्योंकि कुछ तो बाबा की शिक्षा का नतीजा था  और कुछ माँ की दुआओं  का असर ....
जब भी कभी अंधेरों ने घेरा ,जब भी कोई राह नज़र नहीं आई
माँ रौशनी बनकर हर तरफ  नज़र आई
जब भी  परेशानियों के काले बादल छा जाते
और आँखों  से नींद छीन लेते, तो अधखुली आँखों में
माँ ख्वाब्ब बनकर आती ,मेरे बालों में उंगलियाँ घुमाती ,
और अपने स्पर्श से मेरे सारे दर्द  हाथों में समेट कर
मुझसे दूर कर देती  ....

आज सुबह उठकर जब माँ की तस्वीर को देखा तो
माँ की आँखें  नम थी ,
जब छूकर देखा तो सचमुच भीगी हुई थी आँखे .......
कल रात मैं उदास था बहोत ....
उसका  जिस्म बदल गया तो क्या ,वो रूह मेरे पास छोड़ गई
माँ, वो अहसास है, जो ख़ुदा के होने का अहसास है 
माँ हर वक़्त मेरे पास है

---Sandhya Sharma